Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.25.8-9: अग्निष्टोम, अश्वमेध, बहुसुवर्णक, राजसूय, गोमेध और वैष्णव - इन छह यज्ञों को पूर्ण करके जब उसने सातवें माहेश्वर यज्ञ का, जिसका अनुष्ठान अन्यों के लिए अत्यंत दुर्लभ है, आरम्भ किया, तब आपके इस पुत्र ने साक्षात् भगवान पशुपति से अनेक वर प्राप्त किए ॥8-9॥ | ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निष्टोम, अश्वमेध, बहुसुवर्णक, राजसूय, गोमेध और वैष्णव - इन छह यज्ञों को पूर्ण करके जब उसने सातवें माहेश्वर यज्ञ का, जिसका अनुष्ठान अन्यों के लिए अत्यंत दुर्लभ है, आरम्भ किया, तब आपके इस पुत्र ने साक्षात् भगवान पशुपति से अनेक वर प्राप्त किए ॥8-9॥
After completing these six yagyas - Agnishtom, Ashwamedha, Bahusuvarnak, Rajasuya, Gomedh and Vaishnav, when he started the seventh Maheshwar Yagya, the ritual of which is very rare for others, then this son of yours received many boons from Lord Pashupati in person. 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥