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ramayan 7.25.51: मधु के महल में आदर पाकर वीर दशग्रीव वहाँ एक रात रुके और फिर प्रातःकाल उठकर वहाँ से प्रस्थान करने को तैयार हुए ॥ 51॥   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.25.51 
प्राप्य पूजां दशग्रीवो मधुवेश्मनि वीर्यवान्।
तत्र चैकां निशामुष्य गमनायोपचक्रमे॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
मधु के महल में आदर पाकर वीर दशग्रीव वहाँ एक रात रुके और फिर प्रातःकाल उठकर वहाँ से प्रस्थान करने को तैयार हुए ॥ 51॥
 
Having been accorded due respect in Madhu's palace, the valiant Daśagriva stayed there for a night, and then getting up in the morning he prepared to leave from there. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)