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ramayan 7.25.46-47h: तुम्हारे प्रति दया और कृपा के कारण मैंने मधु को मारने का विचार त्याग दिया है।’ रावण के ऐसा कहने पर राक्षसी कन्या कुंभिनसी बहुत प्रसन्न हुई और अपने सोए हुए पति के पास गई तथा रात्रि के प्राणी को जगाकर बोली -॥46 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.25.46-47h 
तव कारुण्यसौहार्दान्निवृत्तोऽस्मि मधोर्वधात्।
इत्युक्ता सा समुत्थाप्य प्रसुप्तं तं निशाचरम्॥ ४६॥
अब्रवीत् सम्प्रहृष्टेव राक्षसी सा पतिं वच:।
 
 
अनुवाद
तुम्हारे प्रति दया और कृपा के कारण मैंने मधु को मारने का विचार त्याग दिया है।’ रावण के ऐसा कहने पर राक्षसी कन्या कुंभिनसी बहुत प्रसन्न हुई और अपने सोए हुए पति के पास गई तथा रात्रि के प्राणी को जगाकर बोली -॥46 1/2॥
 
Out of compassion and kindness towards you I have given up the idea of ​​killing Madhu.' At Ravana's saying this the demoness daughter Kumbhinasī became very happy and went to her sleeping husband and woke up the night creature and said -॥ 46 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)