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ramayan 7.25.41-43h: वह बोली, 'हे दूसरों का आदर करने वाले दैत्यराज! हे महाबाहु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो आज यहाँ मेरे पति को न मारें; क्योंकि कुलीन कुल की स्त्रियों के लिए वैधव्य के समान कोई भय नहीं होता। स्त्री के लिए वैधव्य सबसे बड़ा भय और सबसे बड़ी समस्या है।' 41-42 1/2।   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 41-43h
 
 
श्लोक  7.25.41-43h 
साब्रवीद् यदि मे राजन् प्रसन्नस्त्वं महाभुज॥ ४१॥
भर्तारं न ममेहाद्य हन्तुमर्हसि मानद।
नहीदृशं भयं किंचित् कुलस्त्रीणामिहोच्यते॥ ४२॥
भयानामपि सर्वेषां वैधव्यं व्यसनं महत्।
 
 
अनुवाद
वह बोली, 'हे दूसरों का आदर करने वाले दैत्यराज! हे महाबाहु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो आज यहाँ मेरे पति को न मारें; क्योंकि कुलीन कुल की स्त्रियों के लिए वैधव्य के समान कोई भय नहीं होता। स्त्री के लिए वैधव्य सबसे बड़ा भय और सबसे बड़ी समस्या है।' 41-42 1/2।
 
She said, 'O king of demons who respect others! O mighty-armed one! If you are pleased with me, then do not kill my husband here today; because there is no fear like widowhood for the wives of a noble family. Widowhood is the biggest fear and the greatest problem for a woman. 41-42 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)