श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  7.25.40-41h 
तां समुत्थापयामास न भेतव्यमिति ब्रुवन्॥ ४०॥
रावणो राक्षसश्रेष्ठ: किं चापि करवाणि ते।
 
 
अनुवाद
तब महाबली रावण ने कहा, 'डरो मत'; फिर उसने कुंभ को उठाकर पूछा, 'तुम्हारे प्रिय कार्यों में से मैं कौन-सा कार्य करूं?'
 
Then the great demon Ravana said, 'Do not be afraid'; then he raised Kumbha and asked, 'Which of your favourite tasks shall I perform?'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas