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ramayan 7.25.4: वहाँ उन्होंने अपने पुत्र मेघनाद को देखा, जो अत्यंत भयंकर लग रहा था, उसने काले मृगचर्म को धारण किया हुआ था, उसके हाथ में जल का कलश, जटा और ध्वज था।   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.25.4 
तत: कृष्णाजिनधरं कमण्डलुशिखाध्वजम्।
ददर्श स्वसुतं तत्र मेघनादं भयावहम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन्होंने अपने पुत्र मेघनाद को देखा, जो अत्यंत भयंकर लग रहा था, उसने काले मृगचर्म को धारण किया हुआ था, उसके हाथ में जल का कलश, जटा और ध्वज था।
 
There he saw his son Meghnad, who looked very fearsome, wearing a black deerskin and carrying a water pot, a crest of hair and a flag.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)