vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना
»
श्लोक 39-40h
श्लोक
7.25.39-40h
सा च प्रह्वाञ्जलिर्भूत्वा शिरसा चरणौ गता॥ ३९॥
तस्य राक्षसराजस्य त्रस्ता कुम्भीनसी तदा।
अनुवाद
उस समय कुम्भैन भयभीत हो गया और हाथ जोड़कर उसने अपना सिर राक्षसराज के चरणों में रख दिया।
At that time Kumbhaina became frightened and with folded hands placed his head at the feet of the Demon King. 39 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×