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ramayan 7.25.35-36h: विभीषण धर्मात्मा थे। अतः वे लंका में ही रहकर धर्म का आचरण करने लगे। शेष सभी महाभाग रात्रि में मधुपुर की ओर चले गए । 35 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.25.35-36h 
विभीषणश्च धर्मात्मा लङ्कायां धर्ममाचरन्॥ ३५॥
शेषा: सर्वे महाभागा ययुर्मधुपुरं प्रति।
 
 
अनुवाद
विभीषण धर्मात्मा थे। अतः वे लंका में ही रहकर धर्म का आचरण करने लगे। शेष सभी महाभाग रात्रि में मधुपुर की ओर चले गए । 35 1/2॥
 
Vibhishana was a religious person. Therefore, he stayed in Lanka and started practicing religion. All the remaining Mahabhagas moved towards Madhupur at night. 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)