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ramayan 7.25.34-35h: मेघनाद अपने सभी सैनिकों के साथ सेना का नेतृत्व कर रहा था। रावण बीच में था और कुंभकर्ण उसके पीछे-पीछे चल रहा था।   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.25.34-35h 
इन्द्रजित् त्वग्रत: सैन्यात् सैनिकान् परिगृह्य च॥ ३४॥
जगाम रावणो मध्ये कुम्भकर्णश्च पृष्ठत:।
 
 
अनुवाद
मेघनाद अपने सभी सैनिकों के साथ सेना का नेतृत्व कर रहा था। रावण बीच में था और कुंभकर्ण उसके पीछे-पीछे चल रहा था।
 
Meghnad led the army with all his soldiers. Ravana was in the middle and Kumbhakarna followed behind. 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)