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ramayan 7.25.33-34h: रावण की आज्ञा से युद्ध के लिए उत्साहित महारथियों की चार हजार अक्षौहिणी सेना नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर शीघ्रतापूर्वक लंका से बाहर निकली।   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.25.33-34h 
अक्षौहिणीसहस्राणि चत्वार्यग्रॺाणि रक्षसाम्॥ ३३॥
नानाप्रहरणान्याशु निर्ययुर्युद्धकाङ्क्षिणाम्।
 
 
अनुवाद
रावण की आज्ञा से युद्ध के लिए उत्साहित महारथियों की चार हजार अक्षौहिणी सेना नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर शीघ्रतापूर्वक लंका से बाहर निकली।
 
At Ravana's command, an army of four thousand Akshauhinis of great demons, enthusiastic about the war, quickly came out of Lanka, armed with various kinds of weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)