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ramayan 7.25.25-26: राजन! जब आपका पुत्र मेघनाद यज्ञ के लिए तैयार हो गया, तब मैं तपस्या के लिए जल के भीतर रहने लगा और महाराज! जब भाई कुम्भकर्ण भी निद्रा का आनंद लेने लगा, तब महाबली दैत्य मधु ने यहाँ आकर राक्षसों में श्रेष्ठ हमारे आदरणीय मंत्रियों को मार डाला और कुम्भिनसी का अपहरण कर लिया॥25-26॥   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  7.25.25-26 
सा हृता मधुना राजन् राक्षसेन बलीयसा।
यज्ञप्रवृत्ते पुत्रे तु मयि चान्तर्जलोषिते॥ २५॥
कुम्भकर्णो महाराज निद्रामनुभवत्यथ।
निहत्य राक्षसश्रेष्ठानमात्यानिह सम्मतान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! जब आपका पुत्र मेघनाद यज्ञ के लिए तैयार हो गया, तब मैं तपस्या के लिए जल के भीतर रहने लगा और महाराज! जब भाई कुम्भकर्ण भी निद्रा का आनंद लेने लगा, तब महाबली दैत्य मधु ने यहाँ आकर राक्षसों में श्रेष्ठ हमारे आदरणीय मंत्रियों को मार डाला और कुम्भिनसी का अपहरण कर लिया॥25-26॥
 
King! When your son Meghnad became ready for the yagya, I started living under water for penance and Maharaj! When brother Kumbhakarna also started enjoying sleep, the mighty demon Madhu came here and killed our respected ministers, who were the best among the demons, and kidnapped Kumbhinasi. 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)