Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.25.21: तब विभीषण अत्यंत क्रोधित होकर अपने भाई रावण से बोले- 'सुनो, तुम्हारे पाप कर्म का फल हमें अपनी बहन के अपहरण के रूप में प्राप्त हुआ है।   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.25.21 
विभीषणस्तु संक्रुद्धो भ्रातरं वाक्यमब्रवीत्।
श्रूयतामस्य पापस्य कर्मण: फलमागतम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब विभीषण अत्यंत क्रोधित होकर अपने भाई रावण से बोले- 'सुनो, तुम्हारे पाप कर्म का फल हमें अपनी बहन के अपहरण के रूप में प्राप्त हुआ है।
 
Then Vibhishan became very angry and said to his brother Ravana - 'Listen, we have received the result of your sinful act in the form of the kidnapping of our sister.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)