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ramayan 7.25.15: "खैर, मैंने जो कुछ किया वह अच्छा ही हुआ; इसमें कोई संदेह नहीं है। सौम्य! अब आओ, चलें। घर चलें।"॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.25.15 
एहीदानीं कृतं यद्धि सुकृतं तन्न संशय:।
आगच्छ सौम्य गच्छाम: स्वमेव भवनं प्रति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
"खैर, मैंने जो कुछ किया वह अच्छा ही हुआ; इसमें कोई संदेह नहीं है। सौम्य! अब आओ, चलें। घर चलें।"॥15॥
 
"Well, whatever I did was good; there is no doubt about it. Saumya! Now come, let's go. Let us go home."॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)