श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.25.11 
एतया किल संग्रामे मायया राक्षसेश्वर।
प्रयुक्तया गति: शक्या नहि ज्ञातुं सुरासुरै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! जब युद्ध में इस माया का प्रयोग किया जाता है, तब देवता और दानव भी इसका प्रयोग करने वाले की गति का पता नहीं लगा पाते। ॥11॥
 
O Lord of demons! When this illusion is used in a battle, even the gods and demons cannot trace the movements of the person using it. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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