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ramayan 7.25.10: इसके अतिरिक्त उसे इच्छानुसार चलने वाला दिव्य रथ भी प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त 'तामसी' नामक माया भी उत्पन्न हुई है, जिससे अंधकार उत्पन्न होता है॥ 10॥   |   ramayan सर्ग 7.25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 25: यज्ञों द्वारा मेघनाद की सफलता, विभीषण का रावण को पर-स्त्री-हरण के दोष बताना, कुम्भीनसी को आश्वासन दे मधु को साथ ले रावण का देवलोक पर आक्रमण करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.25.10 
कामगं स्यन्दनं दिव्यमन्तरिक्षचरं ध्रुवम्।
मायां च तामसीं नाम यया सम्पद्यते तम:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त उसे इच्छानुसार चलने वाला दिव्य रथ भी प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त 'तामसी' नामक माया भी उत्पन्न हुई है, जिससे अंधकार उत्पन्न होता है॥ 10॥
 
‘Apart from this, he has also obtained a divine chariot that moves as per one's wish. Besides this, a maya (illusion) called 'Tamaasi' has also been produced, with the help of which darkness is created.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)