Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.24.9-10h: सुन्दर मध्यभाग वाली वे सभी सुन्दरियाँ शोक, शोक और भय से व्याकुल और व्याकुल हो उठीं। उनके उष्ण निःश्वास के कारण पुष्पकविमान सब ओर से जल रहा था और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अग्नि स्थापित अग्नि स्नानगृह हो ॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  7.24.9-10h 
शोकदु:खभयत्रस्ता विह्वलाश्च सुमध्यमा:।
तासां नि:श्वासवातेन सर्वत: सम्प्रदीपितम्॥ ९॥
अग्निहोत्रमिवाभाति संनिरुद्धाग्नि पुष्पकम्।
 
 
अनुवाद
सुन्दर मध्यभाग वाली वे सभी सुन्दरियाँ शोक, शोक और भय से व्याकुल और व्याकुल हो उठीं। उनके उष्ण निःश्वास के कारण पुष्पकविमान सब ओर से जल रहा था और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अग्नि स्थापित अग्नि स्नानगृह हो ॥9 1/2॥
 
All those beauties with beautiful midsections were distressed and distraught with grief, sorrow and fear. Due to his hot exhalation, the Pushpakvimana was burning from all sides and it looked like a fire bath room in which fire had been established. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)