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ramayan 7.24.4: वे सभी एक साथ दुःख के मारे आँसू बहाने लगे। दुःख और भय से निकले उनके आँसुओं की प्रत्येक बूँद आग की चिंगारी के समान प्रतीत हो रही थी।   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.24.4 
ता हि सर्वा: समं दु:खान्मुमुचुर्बाष्पजं जलम्।
तुल्यमग्नॺर्चिषां तत्र शोकाग्निभयसम्भवम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वे सभी एक साथ दुःख के मारे आँसू बहाने लगे। दुःख और भय से निकले उनके आँसुओं की प्रत्येक बूँद आग की चिंगारी के समान प्रतीत हो रही थी।
 
All of them started shedding tears out of grief at the same time. Every drop of their tears arising out of grief and fear looked like a spark of fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)