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ramayan 7.24.37-38h: यह तुम्हारा चचेरा भाई, रात्रिकालीन खर, सब कुछ करने में समर्थ है और सदैव आज्ञा का पालन करने वाला है ॥37 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.24.37-38h 
तत्र मातृष्वसेयस्ते भ्रातायं वै खर: प्रभु:॥ ३७॥
भविष्यति तवादेशं सदा कुर्वन् निशाचर:।
 
 
अनुवाद
यह तुम्हारा चचेरा भाई, रात्रिकालीन खर, सब कुछ करने में समर्थ है और सदैव आज्ञा का पालन करने वाला है ॥37 1/2॥
 
This cousin of yours, the night-time Khar, is capable of doing everything and will always obey orders. ॥ 37 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)