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ramayan 7.24.36-37h: तुम अपने धनवान भाई खर के पास जाकर रहो। तुम्हारा महाबली भाई खर चौदह हजार राक्षसों का अधिपति होगा। वह उन्हें जहाँ चाहेगा वहाँ भेज देगा और उन्हें भोजन, जल और वस्त्र प्रदान कर सकेगा॥ 36 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.24.36-37h 
भ्रातुरैश्वर्ययुक्तस्य खरस्य वस पार्श्वत:।
चतुर्दशानां भ्राता ते सहस्राणां भविष्यति॥ ३६॥
प्रभु: प्रयाणे दाने च राक्षसानां महाबल:।
 
 
अनुवाद
तुम अपने धनवान भाई खर के पास जाकर रहो। तुम्हारा महाबली भाई खर चौदह हजार राक्षसों का अधिपति होगा। वह उन्हें जहाँ चाहेगा वहाँ भेज देगा और उन्हें भोजन, जल और वस्त्र प्रदान कर सकेगा॥ 36 1/2॥
 
‘You go and stay with your wealthy brother Khara. Your mighty brother Khara will be the ruler of fourteen thousand demons. He will send them wherever he wants and will be able to provide them with food, drink and clothing.॥ 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)