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ramayan 7.24.32-33h: 'बेटी! अब रोने से कोई लाभ नहीं, तुम्हें किसी प्रकार भी डरना नहीं चाहिए। मैं तुम्हें दान, आदर और अनुग्रह से संतुष्ट करने का प्रयत्न करूँगा।'   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.24.32-33h 
अलं वत्से रुदित्वा ते न भेतव्यं च सर्वश:॥ ३२॥
दानमानप्रसादैस्त्वां तोषयिष्यामि यत्नत:।
 
 
अनुवाद
'बेटी! अब रोने से कोई लाभ नहीं, तुम्हें किसी प्रकार भी डरना नहीं चाहिए। मैं तुम्हें दान, आदर और अनुग्रह से संतुष्ट करने का प्रयत्न करूँगा।'
 
‘Daughter! Now crying is of no use, you should not be afraid in any way. I will try to satisfy you with charity, respect and grace. 32 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)