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ramayan 7.24.31-32h: जब उसकी बहन रोती हुई और शाप देती हुई ऐसा कहने लगी, तब दशग्रीव ने उसे सान्त्वना दी और मधुर वाणी में समझाते हुए कहा -॥31 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.24.31-32h 
एवमुक्तो दशग्रीवो भगिन्या क्रोशमानया॥ ३१॥
अब्रवीत् सान्त्वयित्वा तां सामपूर्वमिदं वच:।
 
 
अनुवाद
जब उसकी बहन रोती हुई और शाप देती हुई ऐसा कहने लगी, तब दशग्रीव ने उसे सान्त्वना दी और मधुर वाणी में समझाते हुए कहा -॥31 1/2॥
 
When his sister said this while crying and cursing, Daśagriva consoled her and explained to her in a sweet voice saying -॥ 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)