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ramayan 7.24.29-30h: 'राजा! मेरे भाई होते हुए भी आपने मुझे (मेरे पति को) अपने हाथों से मार डाला। अब आपके कारण मैं विधवा कहलाऊँगी।'   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.24.29-30h 
त्वयास्मि निहता राजन् स्वयमेव हि बन्धुना॥ २९॥
राजन् वैधव्यशब्दं च भोक्ष्यामि त्वत्कृतं ह्यहम्।
 
 
अनुवाद
'राजा! मेरे भाई होते हुए भी आपने मुझे (मेरे पति को) अपने हाथों से मार डाला। अब आपके कारण मैं विधवा कहलाऊँगी।'
 
‘King! Despite being my brother, you killed me (my husband) with your own hands. Now, because of you, I will be called a widow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)