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ramayan 7.24.28-29h: 'पिताजी! उनमें मेरे पराक्रमी पति भी थे, जो मेरे प्राणों से भी अधिक प्रतिष्ठित थे। आपने उन्हें भी मार डाला। आप तो केवल नाम के लिए मेरे भाई हैं। वास्तव में आप मेरे शत्रु निकले!॥28 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.24.28-29h 
प्राणेभ्योऽपि गरीयान् मे तत्र भर्ता महाबल:॥ २८॥
सोऽपि त्वया हतस्तात रिपुणा भ्रातृगन्धिना।
 
 
अनुवाद
'पिताजी! उनमें मेरे पराक्रमी पति भी थे, जो मेरे प्राणों से भी अधिक प्रतिष्ठित थे। आपने उन्हें भी मार डाला। आप तो केवल नाम के लिए मेरे भाई हैं। वास्तव में आप मेरे शत्रु निकले!॥28 1/2॥
 
‘Father! Among them was my mighty husband, who was more respected than my life. You killed him too. You are my brother in name only. In reality you turned out to be my enemy!॥28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)