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ramayan 7.24.27-28h: दैत्यराज! आपने युद्धभूमि में अपने पराक्रम और पराक्रम से कालकेय नामक चौदह हज़ार राक्षसों का वध किया है।   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.24.27-28h 
एते राजंस्त्वया वीर्याद् दैत्या विनिहता रणे॥ २७॥
कालकेया इति ख्याता: सहस्राणि चतुर्दश।
 
 
अनुवाद
दैत्यराज! आपने युद्धभूमि में अपने पराक्रम और पराक्रम से कालकेय नामक चौदह हज़ार राक्षसों का वध किया है।
 
Demon King! With your might and valour on the battlefield you have killed fourteen thousand demons named Kalkeya. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)