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ramayan 7.24.18-19h: 'अहा! यह परम बलवान राक्षस सदैव संहार के साधनों में ही लीन रहता है। अहा! यह पापी पाप के मार्ग पर चलते हुए भी अपने को नहीं धिक्कारता।॥18 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  7.24.18-19h 
अहो सुबलवद् रक्षो वधोपायेषु रज्यते॥ १८॥
अहो दुर्वृत्तमास्थाय नात्मानं वै जुगुप्सते।
 
 
अनुवाद
'अहा! यह परम बलवान राक्षस सदैव संहार के साधनों में ही लीन रहता है। अहा! यह पापी पाप के मार्ग पर चलते हुए भी अपने को नहीं धिक्कारता।॥18 1/2॥
 
‘Oh! This extremely powerful demon is always engrossed in the means of killing. Oh! This sinner does not rebuke himself even after walking on the path of evil deeds.॥ 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)