Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.24.14-16: 'हाय! पति से वियोग होकर मैं क्या करूँगी? (कैसे रहूँगी?) हे मृत्युदेव! मैं प्रार्थना करती हूँ कि आप प्रसन्न होकर मुझ अभागिनी को इस संसार से ले जाएँ। हाय! पूर्वजन्म में हमने कौन-सा पाप किया था, जिसके कारण हम सब दुःख भोग रहे हैं और शोकसागर में गिर पड़े हैं। निश्चय ही इस समय हमें अपने दुःख का अन्त नहीं दिखाई देता।॥14-16॥ | ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हा कथं नु करिष्यामि भर्तुस्तस्मादहं विना॥ १४॥
मृत्यो प्रसादयामि त्वां नय मां दु:खभागिनीम्।
किं नु तद् दुष्कृतं कर्म पुरा देहान्तरे कृतम्॥ १५॥
एवं स्म दु:खिता: सर्वा: पतिता: शोकसागरे।
न खल्विदानीं पश्यामो दु:खस्यास्यान्तमात्मन:॥ १६॥
अनुवाद
'हाय! पति से वियोग होकर मैं क्या करूँगी? (कैसे रहूँगी?) हे मृत्युदेव! मैं प्रार्थना करती हूँ कि आप प्रसन्न होकर मुझ अभागिनी को इस संसार से ले जाएँ। हाय! पूर्वजन्म में हमने कौन-सा पाप किया था, जिसके कारण हम सब दुःख भोग रहे हैं और शोकसागर में गिर पड़े हैं। निश्चय ही इस समय हमें अपने दुःख का अन्त नहीं दिखाई देता।॥14-16॥
‘Alas! What will I do after being separated from my husband? (How will I live?) O Lord of Death! I pray that you become pleased and take me, the wretched one, away from this world. Alas! What sin did we commit in our previous life through another body, due to which all of us are suffering from sorrow and have fallen into the ocean of grief. Certainly, at this moment we do not see an end to our sorrow.॥ 14-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥