श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.24.11-12h 
काचिच्चिन्तयती तत्र किं नु मां भक्षयिष्यति॥ ११॥
काचिद् दध्यौ सुदु:खार्ता अपि मां मारयेदयम्।
 
 
अनुवाद
कुछ लोग सोच रहे थे कि कहीं यह राक्षस उन्हें खा न जाए। कुछ बहुत दुखी और चिंतित थे कि कहीं यह रात्रिकालीन प्राणी उन्हें मार न डाले।
 
Some wondered if this demon would eat them up. Some were very sad and worried whether this night-time creature would kill them.
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