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ramayan 7.24.10-11h: दशग्रीव के चंगुल में फँसी वे असहाय स्त्रियाँ सिंह के पंजे में फँसी हिरणी की तरह तड़प रही थीं। उनके चेहरे और आँखें लाचारी से भरी थीं और वे लगभग सोलह वर्ष की थीं।   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.24.10-11h 
दशग्रीववशं प्राप्तास्तास्तु शोकाकुला: स्त्रिय:॥ १०॥
दीनवक्त्रेक्षणा: श्यामा मृग्य: सिंहवशा इव।
 
 
अनुवाद
दशग्रीव के चंगुल में फँसी वे असहाय स्त्रियाँ सिंह के पंजे में फँसी हिरणी की तरह तड़प रही थीं। उनके चेहरे और आँखें लाचारी से भरी थीं और वे लगभग सोलह वर्ष की थीं।
 
Those helpless women in the clutches of Dashagriva were grieving like deer in the paws of a lion. Their faces and eyes were filled with helplessness and they were all around sixteen years old.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)