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ramayan 7.24.1: लौटते समय दुष्ट बुद्धि वाला रावण हर्ष से भर गया। मार्ग में उसने अनेक राजाओं, ऋषियों, देवताओं और राक्षसों की कन्याओं का हरण किया।॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 24: रावण द्वारा अपहृत हुई देवता आदि की कन्याओं और स्त्रियों का विलाप एवं शाप, रावण का रोती हुई शूर्पणखा को आश्वासन देना और उसे खर के साथ दण्डकारण्य में भेजना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.24.1 
निवर्तमान: संहृष्टो रावण: स दुरात्मवान्।
जह्रे पथि नरेन्द्रर्षिदेवदानवकन्यका:॥ १॥
 
 
अनुवाद
लौटते समय दुष्ट बुद्धि वाला रावण हर्ष से भर गया। मार्ग में उसने अनेक राजाओं, ऋषियों, देवताओं और राक्षसों की कन्याओं का हरण किया।॥1॥
 
While returning, the evil-minded Ravana was filled with joy. On the way he abducted the daughters of many kings, sages, gods and demons.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)