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ramayan 7.23.53: मंत्री के ये वचन सुनकर राक्षसराज रावण ने वहाँ अपना नाम घोषित किया और हर्ष से गर्जना करता हुआ वरुण के महल से बाहर आया ॥53॥   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.23.53 
राक्षसेन्द्रस्तु तच्छ्रुत्वा नाम विश्राव्य चात्मन:।
हर्षान्नादं विमुञ्चन् वै निष्क्रान्तो वरुणालयात्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
मंत्री के ये वचन सुनकर राक्षसराज रावण ने वहाँ अपना नाम घोषित किया और हर्ष से गर्जना करता हुआ वरुण के महल से बाहर आया ॥53॥
 
On hearing these words of the minister, the demon king Ravana announced his name there and came out of Varuna's palace roaring with joy. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)