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ramayan 7.23.44-45h: पुष्पक विमान पर आरूढ़ उस महाबली योद्धा ने विचित्र मूसलों, सैकड़ों भालों, कटड़ों, बर्छियों और बड़ी-बड़ी शतघ्नियों से उन सब पर आक्रमण किया।   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  7.23.44-45h 
मुसलानि विचित्राणि ततो भल्लशतानि च।
पट्टिशांश्चैव शक्तीश्च शतघ्नीर्महतीरपि॥ ४४॥
पातयामास दुर्धर्षस्तेषामुपरि विष्ठित:।
 
 
अनुवाद
पुष्पक विमान पर आरूढ़ उस महाबली योद्धा ने विचित्र मूसलों, सैकड़ों भालों, कटड़ों, बर्छियों और बड़ी-बड़ी शतघ्नियों से उन सब पर आक्रमण किया।
 
That fierce warrior, seated on the Pushpaka-vimana, attacked them all with strange pestles, hundreds of spears, sashes, spears and large Shataghnis. 44 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)