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ramayan 7.23.43: यह देखकर दशग्रीव प्रलयकाल की अग्नि के समान क्रोध से प्रचण्ड हो उठा और वरुण के उन पुत्रों के हृदयस्थानों पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा॥43॥   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.23.43 
तत: क्रुद्धो दशग्रीव: कालाग्निरिव मूर्च्छित:।
शरवर्षं महाघोरं तेषां मर्मस्वपातयत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर दशग्रीव प्रलयकाल की अग्नि के समान क्रोध से प्रचण्ड हो उठा और वरुण के उन पुत्रों के हृदयस्थानों पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा॥43॥
 
Seeing this, Dashagriva became furious with rage like the fire of the doomsday and started showering fierce arrows on the heart places of those sons of Varun. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)