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ramayan 7.23.4: तत्पश्चात् वह राक्षस रसातल में जाने की इच्छा से दैत्यों और नागों से सेवित तथा वरुण द्वारा रक्षित जलसागर में प्रवेश कर गया॥4॥   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.23.4 
ततो रसातलं रक्ष: प्रविष्ट: पयसां निधिम्।
दैत्योरगगणाध्युष्टं वरुणेन सुरक्षितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह राक्षस रसातल में जाने की इच्छा से दैत्यों और नागों से सेवित तथा वरुण द्वारा रक्षित जलसागर में प्रवेश कर गया॥4॥
 
Thereafter, that demon, desirous of going into the abyss, entered the ocean of water, served by demons and serpents and protected by Varuna. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)