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ramayan 7.23.33: जब पृथ्वी पर खड़े होकर उन्होंने पुष्पक विमान पर बैठे रावण को देखा, तो वे भी तुरन्त अपने वेगवान रथों पर सवार होकर आकाश में पहुँच गये।   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.23.33 
महीतलगतास्ते तु रावणं दृश्य पुष्पके।
आकाशमाशु विविशु: स्यन्दनै: शीघ्रगामिभि:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब पृथ्वी पर खड़े होकर उन्होंने पुष्पक विमान पर बैठे रावण को देखा, तो वे भी तुरन्त अपने वेगवान रथों पर सवार होकर आकाश में पहुँच गये।
 
When, while standing on the earth, they saw Ravana seated on the Pushpaka aircraft, they too immediately reached the sky in their swift chariots.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)