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ramayan 7.23.32: युद्ध में अपनी सेना की दुर्दशा देखकर वरुण के पुत्र बाणों से आहत होकर कुछ समय के लिए युद्ध से हट गए ॥32॥   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.23.32 
समीक्ष्य स्वबलं संख्ये वरुणस्य सुतास्तदा।
अर्दिता: शरजालेन निवृत्ता रणकर्मण:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में अपनी सेना की दुर्दशा देखकर वरुण के पुत्र बाणों से आहत होकर कुछ समय के लिए युद्ध से हट गए ॥32॥
 
Seeing the condition of their army in the war, the sons of Varuna, being hurt by the arrows, withdrew from the fighting for some time. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)