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ramayan 7.23.2: उसके सब अंग रक्त से लथपथ हो गए और प्रहारों से क्षत-विक्षत हो गए। रावण को इस अवस्था में देखकर उन राक्षसों को बड़ा आश्चर्य हुआ॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.23.2 
ततो रुधिरसिक्ताङ्गं प्रहारैर्जर्जरीकृतम्।
रावणं राक्षसा दृष्ट्वा विस्मयं समुपागमन्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसके सब अंग रक्त से लथपथ हो गए और प्रहारों से क्षत-विक्षत हो गए। रावण को इस अवस्था में देखकर उन राक्षसों को बड़ा आश्चर्य हुआ॥ 2॥
 
All his limbs were soaked in blood and were damaged by the blows. Seeing Ravana in this state, those demons were very surprised.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)