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ramayan 7.23.16: उन्होंने निवातकवचों से सौ प्रकार की मायाओं का ज्ञान प्राप्त किया और तत्पश्चात् वरुण की नगरी की खोज में रसातल में विचरण करने लगे॥16॥   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.23.16 
तत्रोपधार्य मायानां शतमेकं समाप्तवान्।
सलिलेन्द्रपुरान्वेषी भ्रमति स्म रसातलम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने निवातकवचों से सौ प्रकार की मायाओं का ज्ञान प्राप्त किया और तत्पश्चात् वरुण की नगरी की खोज में रसातल में विचरण करने लगे॥16॥
 
He acquired knowledge of hundred types of illusions from the Nivatakavachas. After that he started roaming all over the Rasatal in search of Varun's city.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)