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ramayan 7.23.14: तब रावण ने अग्नि को साक्षी मानकर निवातकवचों से मित्रता की, जिससे वह बहुत प्रसन्न हुआ ॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.23.14 
ततोऽग्निसाक्षिकं सख्यं कृतवांस्तत्र रावण:।
निवातकवचै: सार्धं प्रीतिमानभवत् तदा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब रावण ने अग्नि को साक्षी मानकर निवातकवचों से मित्रता की, जिससे वह बहुत प्रसन्न हुआ ॥14॥
 
Then Ravan made friendship with the Nivatakavachas by taking Agni as witness. This made him very happy. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)