श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.23.13 
राक्षसस्य सखित्वं च भवद्भि: सह रोचते।
अविभक्ताश्च सर्वार्था: सुहृदां नात्र संशय:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
(तुम दोनों की कृपा-शक्ति एक ही है) इसीलिए मुझे अच्छा लगता है कि यह राक्षस तुम दोनों का मित्र बन जाए; क्योंकि मित्रों की सभी वस्तुएँ (भोग-सामग्री) एक-दूसरे के लिए समान होती हैं - वे अलग-अलग नहीं बँटी होतीं। यह बात निःसंदेह सत्य है।
 
(Both of you have the same power of blessings) That is why I like that this demon becomes friends with you two; because all the things (objects of enjoyment) of friends are same for each other – they are not divided separately. This is undoubtedly the case.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)