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श्लोक 10
श्लोक
7.23.10
तत: पितामहस्तत्र त्रैलोक्यगतिरव्यय:।
आजगाम द्रुतं देवो विमानवरमास्थित:॥ १०॥
अनुवाद
तब त्रिभुवन के आश्रयदाता अविनाशी पितामह भगवान ब्रह्माजी शीघ्र ही एक सुन्दर विमान पर बैठकर वहाँ आ पहुँचे॥10॥
Then the indestructible grandfather Lord Brahma, who was the shelter of Tribhuvan, quickly came there sitting on a beautiful plane. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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