श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.23.10 
तत: पितामहस्तत्र त्रैलोक्यगतिरव्यय:।
आजगाम द्रुतं देवो विमानवरमास्थित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब त्रिभुवन के आश्रयदाता अविनाशी पितामह भगवान ब्रह्माजी शीघ्र ही एक सुन्दर विमान पर बैठकर वहाँ आ पहुँचे॥10॥
 
Then the indestructible grandfather Lord Brahma, who was the shelter of Tribhuvan, quickly came there sitting on a beautiful plane. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)