श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.22.6 
तस्य पार्श्वेषु निश्छिद्रा: कालपाशा: प्रतिष्ठिता:।
पावकस्पर्शसंकाश: स्थितो मूर्तश्च मुद‍्गर:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उनके दोनों ओर छिद्ररहित कालपाश खड़ा था और अग्नि के समान पीड़ा देने वाला स्पर्श करने वाला मुद्गर भी मूर्ति के रूप में विद्यमान था॥6॥
 
On both sides of them, Kaalpash, without holes, was standing and Mudgar, whose touch is as painful as fire, was also present in the form of a statue. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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