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श्लोक 7.22.51  |
स तु वैवस्वतो देवै: सह ब्रह्मपुरोगमै:।
जगाम त्रिदिवं हृष्टो नारदश्च महामुनि:॥ ५१॥ |
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| अनुवाद |
| तदनन्तर सूर्यपुत्र यमराज और महर्षि नारदजी ब्रह्मा आदि देवताओं के साथ सुखपूर्वक स्वर्गलोक को चले गए॥51॥ |
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| Thereafter Surya's son Yamraj and great sage Naradji went to heaven happily along with gods like Brahma etc. 51॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे द्वाविंश: सर्ग: ॥ २ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बाईसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ २॥ |
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