श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.22.51 
स तु वैवस्वतो देवै: सह ब्रह्मपुरोगमै:।
जगाम त्रिदिवं हृष्टो नारदश्च महामुनि:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर सूर्यपुत्र यमराज और महर्षि नारदजी ब्रह्मा आदि देवताओं के साथ सुखपूर्वक स्वर्गलोक को चले गए॥51॥
 
Thereafter Surya's son Yamraj and great sage Naradji went to heaven happily along with gods like Brahma etc. 51॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे द्वाविंश: सर्ग: ॥ २ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बाईसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ २॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas