vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान
»
श्लोक 50
श्लोक
7.22.50
दशग्रीवस्तु तं जित्वा नाम विश्राव्य चात्मन:।
आरुह्य पुष्पकं भूयो निष्क्रान्तो यमसादनात्॥ ५०॥
अनुवाद
इस प्रकार यमराज को परास्त करके तथा अपना नाम घोषित करके दशग्रीव रावण पुष्पकविमान पर सवार होकर यमलोक से चला गया ॥50॥
In this way, after defeating Yamraj and announcing his name, Dashagriva Ravana went away from Yamalok riding on Pushpakavimaan. 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×