श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.22.5 
कालदण्डस्तु पार्श्वस्थो मूर्तिमानस्य चाभवत्।
यमप्रहरणं दिव्यं तेजसा ज्वलदग्निवत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कालदण्ड उनकी बगल में मूर्ति के रूप में खड़ा था, जो उनका मुख्य एवं दिव्यास्त्र था। वह अपने तेज से अग्नि के समान दहक रहा था॥5॥
 
Kaaldanda stood in the form of a statue on his side, which is his main and divine weapon. He was burning like fire with his brilliance. 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas