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ramayan 7.22.49: अतः अब मैं उसकी दृष्टि से दूर जा रहा हूँ, ऐसा कहकर यमराज अपने रथ और घोड़ों सहित वहाँ से अदृश्य हो गये।   |   ramayan सर्ग 7.22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.22.49 
एष तस्मात् प्रणश्यामि दर्शनादस्य रक्षस:।
इत्युक्त्वा सरथ: साश्वस्तत्रैवान्तरधीयत॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
अतः अब मैं उसकी दृष्टि से दूर जा रहा हूँ, ऐसा कहकर यमराज अपने रथ और घोड़ों सहित वहाँ से अदृश्य हो गये।
 
"Therefore I am now going out of his sight", saying this Yamaraja along with his chariot and horses disappeared from there. 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)