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ramayan 7.22.48: परंतु यदि मैं इस राक्षस को मारने में असमर्थ हूँ क्योंकि मुझे वरदान प्राप्त है, तो अब इससे युद्ध करके मुझे क्या लाभ होगा ?॥ 48॥   |   ramayan सर्ग 7.22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.22.48 
किं त्विदानीं मया शक्यं कर्तुं रणगतेन हि।
न मया यद्ययं शक्यो हन्तुं वरपुरस्कृत:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
परंतु यदि मैं इस राक्षस को मारने में असमर्थ हूँ क्योंकि मुझे वरदान प्राप्त है, तो अब इससे युद्ध करके मुझे क्या लाभ होगा ?॥ 48॥
 
But if I am unable to kill this demon because I have the boon, then what will I achieve by fighting with him now?॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)