श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.22.47 
एवमुक्तस्तु धर्मात्मा प्रत्युवाच यमस्तदा।
एष व्यावर्तितो दण्ड: प्रभविष्णुर्हि नो भवान्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर धर्मात्मा यमराज बोले, "यदि ऐसी बात है, तो मैंने यह दण्ड हटा दिया है। आप हम सबके स्वामी हैं (अतः आपकी आज्ञा का पालन करना हमारा कर्तव्य है)।" 47.
 
When Brahmaji said this, the righteous Yamraj replied, "If that is the case, then I have removed this punishment. You are the Lord of all of us (so it is our duty to obey your orders)." 47.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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