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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान
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श्लोक 45
श्लोक
7.22.45
यदि ह्यस्मिन् निपतिते न म्रियेतैष राक्षस:।
म्रियते वा दशग्रीवस्तदाप्युभयतोऽनृतम्॥ ४५॥
अनुवाद
यदि यह राक्षस रावण मृत्युदण्ड पाकर न मरे अथवा मर जाए, तो दोनों ही दशाओं में मेरा कथन मिथ्या होगा ॥ 45॥
If this demon Ravan does not die after being punished by death or if he dies, then in both the cases my statement will be false. ॥ 45॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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