श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.22.4 
प्रासमुद‍्गरहस्तश्च मृत्युस्तस्याग्रत: स्थित:।
येन संक्षिप्यते सर्वं त्रैलोक्यमिदमव्ययम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनके सामने साक्षात् मृत्युदेव खड़े थे, उनके हाथों में प्रास और मुद्गर था, जो सदा प्रवाहित रहने वाले सम्पूर्ण त्रिभुवन का नाश कर देते हैं॥4॥
 
In front of them stood the death god in person, holding Prasas and Mudgar in his hands, who destroys the entire Tribhuvan, which remains eternally flowing. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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