श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.22.35 
दर्शनादेव य: प्राणान् प्राणिनामपि कर्षति।
किं पुन: स्पृशमानस्य पात्यमानस्य वा पुन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वह कालदण्ड तो दृष्टि मात्र से ही प्राणियों के प्राण हर लेता था, फिर यदि वह छू लेता है या चोट खा लेता है, तो उसके प्राण हर लेना कौन बड़ी बात है?॥ 35॥
 
That 'Kala Danda' (dagger of death) used to snatch away the lives of the living beings merely by coming in sight. Then, what is a big deal for it to take away the life of the person who gets touched by it or who gets hit by it?॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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